हाल ही में बीटीएस के सदस्य आरएम ने समूह के एक लाइव प्रसारण के दौरान अपनी कंपनी को लेकर जो खुलकर बातें कहीं, उसने प्रशंसकों और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के बीच तीखी बहस छेड़ दी है। आरएम ने बिना किसी लाग-लपेट के अपने अनुभव साझा किए, जिससे कई लोग हैरान रह गए।
आरएम ने इशारों में बताया कि कलाकारों पर लगातार बढ़ता दबाव, रचनात्मक आज़ादी की कमी और भावनात्मक थकान जैसी समस्याएँ लंबे समय से मौजूद हैं। उनके शब्दों से यह साफ झलका कि चमक-दमक के पीछे कलाकारों को कई मुश्किल हालातों का सामना करना पड़ता है।
इस बयान के बाद लोगों की राय दो हिस्सों में बंट गई। एक वर्ग ने आरएम की ईमानदारी की सराहना करते हुए कहा कि इतने बड़े कलाकार का सच बोलना साहस की बात है। वहीं दूसरे वर्ग का मानना है कि ऐसी बातें सार्वजनिक मंच पर नहीं कही जानी चाहिए थीं, क्योंकि इससे समूह और कंपनी दोनों की छवि पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, अधिकांश प्रशंसकों का यह भी कहना है कि आरएम ने जो कहा, वह केवल उनकी नहीं बल्कि पूरी मनोरंजन इंडस्ट्री की सच्चाई को दर्शाता है। यह घटना एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि कलाकारों की मानसिक स्थिति और स्वतंत्रता को कितना महत्व दिया जाता है।